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इस टीचर की ज़लील हरकत देखकर, शैतान भी शर्म से डूब मरेगा

मां-बाप अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं कि वो अच्छे इंसान बनने के साथ कामयाबी हासिल करेंगे. मगर जब स्कूल में असम के इस टीचर की तरह शैतान बैठा हो, तो बच्चों का भविष्य क्या होगा? असम के इस टीचर ने स्कूल की लड़कियों को सेक्शुअली हैरेस किया. उनके साथ फोटो खींचे और उन्हें बदनाम करने के लिए फोटो इंटरनेट पर डाल दिए. इस ज़लील हरकत को देखकर शैतान भी शर्म से डूब मरेगा.

असम में इन तस्वीर को लेकर बवाल मच गया है. टीचर का नाम फैजुद्दीन लश्कर बताया जा रहा है, जो हैलाकांडी जिले के कत्लीचेरा इलाके में रहता है. टीचर के खिलाफ लोग कड़ी कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं. एनजीओ ‘उत्साह’ ने इस मामले को लेकर टीचर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है.

एनजीओ ने असम राज्य के बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भी इस मामले से अवगत कराया है. ये जानकारी एनजीओ ने अपनी फेसबुक पोस्ट के जरिए दी है. इसके अलावा संगठन ने नाजिर मोहम्मद नाम के शख्स के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई है. एनजीओ का कहना है कि नाजिर ने बिना लड़की का चेहरा छिपाए लड़की के सम्मान को चोट पहुंचाई है, जो बहुत गलत है.

इन तस्वीरों को देखकर गांवों का माहौल याद आ रहा है, जहां बच्चों को स्कूल भेजकर लोग बेफिक्र हो जाते हैं. न ये जानने की कोशिश करते कि आज उनके बच्चे ने स्कूल में क्या किया? न ये पूछते कि आज का उसका दिन कैसा गुज़रा. कोई परेशानी तो नहीं. गांव अक्सर देखा है कि पिता बच्चों के मन में इतना खौफ होता है कि लड़कियां तो घर में घुसकर बैठ जाती हैं. और अगर बाप कहे कि पानी लाओ, मेरा ये सामान कहां है, तो ये लड़कियां दबे पांव पानी लाकर देती हैं, और सामान उठाकर देने लगती हैं. लड़कियों का अपनी बातें शेयर करना तो दूर पिता के सामने बोल भी नहीं पाती. जिसका फायदा अनजान लोग उठा लेते हैं और लड़कियों को धमका देते हैं कि किसी से कहा तो ऐसा कर देंगे. वैसा कर देंगे. तो कुछ बच्चे पिता के खौफ से ही बात नहीं बता पाते.

इन तस्वीरों को देखकर कोई कह सकता है कि ये लड़कियों ने अपनी मर्ज़ी से खिंचवाई. लेकिन ये तब तक नहीं हुआ होगा जब तक कि उन्हें या तो बहलाया नहीं गया हो या फिर किसी और तरह से तैयार न किया गया हो. लड़कियों की सुरक्षा के लिहाज से इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर अपलोड कर देना बहुत खतरनाक है. 

ऐसे में ज़रूरी है कि मां-बाप अपने बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार करें, उनमें विश्वास जगाएं. ताकि बच्चे अपनी हर बात घर आकर शेयर कर सकें. ऐसा करने पर शायद बच्चे ज्यादा सुरक्षित हो.

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