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तीन तलाक: पढ़ें, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और सरकार की दलीलें

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPB) ने तीन तलाक को सही ठहराने के लिए कई दलीलों का सहारा लिया है और इधर, सरकार ने भी इसपर अपनी दलील दी है।  आज तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आना है।

 

बोर्ड की दलील

1-बोर्ड का कहना है कि इसका मकसद महिलाओं की रक्षा करना है।
2-बोर्ड का कहना है कि तीन तलाक धार्मिक आजादी के लिए सुरक्षित फैसला है, कोर्ट किसी कागजात के आधार पर इसमें बदलाव नहीं कर सकता है।
3-तीन तलाक अवांछित है लेकिन वैध है।
4-1400 साल से ये प्रथा चल रही है, जैसे रामलल्ला हिंदूओं के भगवान है।
5-बोर्ड का कहना है कि पुरुषों को अपनी भावनाओं पर ज्यादा नियंत्रण होता है, वे ज्यादा संयम में रहते हैं।इसलिए उनके द्वारा जज्बाती फैसले लेने की संभावना बहुत कम होती है।
6-बोर्ड ने निकाह और तलाक के सारे नियमों को समझकर लेखनी के हिसाब से इस नियम को तैयार किया है।
7-पर्सनल लॉ में इसे मान्यता दी गई है। तलाक के बाद उस पत्नी के साथ रहना पाप है। धर्म निरपेक्ष अदालत इस पाप के लिये मजबूर नहीं कर सकती।

 

याचिकाकर्ताओं की दलील

तीन तलाक महिलाओं के साथ भेदभाव है इसे खत्म किया जाये।
महिलाओं को तलाक लेने के लिये कोर्ट जाना पड़ता है। जब कि पुरूषों को मनमाना हक दिया गया है।
कुरान में भी तीन तलाक का जिक्र नहीं है।
यह गैरकानूनी एवं असंवैधानिक है।

 

सरकार की दलील

1-ये धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं है इसलिये इसे धार्मिक आजादी के मौलिक अधिकार में संरक्षण नहीं दिया जा सकता है।
2-तीन तलाक महिलाओं को संविधान में मिले बराबरी और गरिमा के साथ जीवन जीने के हक का हनन है।
3-पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित 22 मुस्लिम देश इसे खत्म कर चुके है।
4-अगर कोर्ट ने हर तरह का तलाक खत्म कर दिया तो सरकार नया कानून लाएगी।
5-सुप्रीम कोर्ट मौलिक अधिकारों का संरक्षक है कोर्ट को फैसला देकर इसे खत्म कर देना चाहिये।
6-इस फैसले का 9 करोड़ लोगों पर गहरा असर होगा।

सौजंय हिन्दुस्तान.com

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